Paper 10 समकालीन महिला लेखन के विविध स्वर

PAPER ID:IJIM/V.III(II)/62-66/10

AUTHOR: डॉ. ममता देवी (Dr. Mamta Devi)

TITLE:समकालीन महिला लेखन के विविध स्वर

ABSTRACT: प्रस्तुत शोधपत्र में समकालीन महिला लेखन के विविध स्वर का अध्ययन किया गया है। इन दिनों समकालीन महिला लेखिकाओं और पुरुष लेखकों में भी नारी-विमर्श और नारी चेतना को लेकर गहरी चिंता और उसकी सशक्त अभिव्यक्ति कथा लेखन में की जा रही है। समकालीन महिला लेखन सम्पूर्ण साहित्य का न सिर्फ स्त्रीवादी नजरिये से पुनर्पाठ करता है, वरन् स्त्री-विमर्श की वैचारिकी को एक वृहद धरातल भी प्रदान करता है, जिसके माध्यम से जेंडरगत विमर्श को एक नयी दिशा मिली है। पारंपरिक रूप में स्त्री की साहित्य में कोई उपस्थिति नहीं थी, सिवाय पुरुष की नकार के रूप में, इस रूप में स्त्री या तो अच्छी होती थी या फिर बुरी, वह या तो पुरुष का सहयोग करती थी या बाधा देती थी। इस रूप में स्त्री-चरित्र जटिलताओं की अभिव्यक्ति नहीं करते। उनकी उपस्थिति भी महत्त्वपूर्ण और वास्तविक उपस्थिति नहीं हुआ करती थी। स्त्रीवादी कथारूप में स्त्रीवादियों ने इस सरलीकृत चरित्रांकन को तोड़ा है और इस प्रक्रिया में पितृसत्तात्मक विमर्श को चुनौती दी है।

KEYWORDS: पितृसत्तात्मक, जड़ीभूत, प्रस्फुटित, तर्कप्रधान, जेंडरगत

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