PAPER ID:IJIM/Vol. 10 (VI) October/49-52/8
AUTHOR: मुनेश देवी (Munesh Devi)
TITLE :भारतीय भाषाओं का सांस्कृतिक महत्व (bhaarateey bhaashaon ka saanskrtik mahatv)
ABSTRACT: भारत भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता वाला देश है। यहाँ की प्रत्येक भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, और सामाजिक एकता की संवाहक है। संस्कृत को भारतीय संस्कृति की आत्मा कहा गया है, क्योंकि इसके माध्यम से वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों की रचना हुई। हिंदी, तमिल, बांग्ला, मराठी, उर्दू आदि भाषाओं ने साहित्य, समाज और संस्कृति को दिशा दी। भाषाओं के माध्यम से लोकगीत, नाटक, और साहित्य ने समाज को जोड़ा है।
आधुनिक युग में भारतीय भाषाएँ डिजिटल माध्यमों, शिक्षा और मीडिया के जरिए पुनः सशक्त हो रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने मातृभाषा और बहुभाषिकता के माध्यम से इनके संरक्षण पर बल दिया है। भारतीय भाषाएँ केवल भाषाई पहचान नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और सभ्यता की जीवंत परंपरा हैं।
KEYWORDS : — भाषाई विविधता, संस्कृति, परंपरा, संस्कृत भाषा, हिंदी साहित्य, क्षेत्रीय भाषाएँ, लोकगीत, नाटक, सामाजिक एकता, डिजिटल माध्यम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, मातृभाषा, सांस्कृतिक धरोहर, साहित्यिक योगदान, धार्मिक ग्रंथ, भक्ति।