बौद्ध संस्कृति एवं कला

PAPER ID:IJIM/Vol. 10 (III)/ /July/13-19/2

AUTHOR: डॉ॰ रेखा

TITLE : बौद्ध संस्कृति एवं कला

ABSTRACT: भारतीय संस्कृति के तीन मूल आधार – कला, शिक्षा एवं साहित्य, और दर्शन एवं साधना – में बौद्ध संस्कृति का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है। करुणा, अहिंसा और मानवता पर आधारित बौद्ध धर्म ने न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि कला, साहित्य और सामाजिक मूल्यों में भी गहन प्रभाव डाला। बौद्ध कला ने मूर्तिकला, चित्रकला और स्थापत्य के माध्यम से धर्म के गूढ़ संदेशों को जनमानस तक पहुँचाया। सांची और अमरावती के स्तूप, नालंदा और विक्रमशीला महाविहार जैसे स्थापत्य अवशेष भारतीय धरोहर के अमूल्य प्रतीक हैं। बुद्ध प्रतिमाओं की आभा और शांति आज भी दर्शकों को आत्मिक गहराई का अनुभव कराती है। सम्राट अशोक के काल में स्तूप और विहारों का व्यापक निर्माण हुआ, जिसने बौद्ध स्थापत्य को विश्वव्यापी पहचान दिलाई। इस शोध में बौद्ध संस्कृति एवं कला की विकास यात्रा, मूर्तिकला और स्थापत्य की विशेषताओं तथा इसके वैश्विक प्रसार के प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

KEYWORDS : बौद्ध संस्कृति, बौद्ध कला, मूर्तिकला, स्थापत्य कला, स्तूप, विहार, अशोक काल, भारतीय संस्कृति, करुणा और अहिंसा, वैश्विक प्रसार

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