सम्राट हुविष्क का राजत्वकाल

PAPER ID:IJIM/Vol. 10 (II)/ /June/31-45/6

AUTHOR: डॉ॰ रेखा (Dr. Rekha)

TITLE :सम्राट हुविष्क का राजत्वकाल (Smraat huvishk ka rajtavkaal)

ABSTRACT:भारत में कुषाण वंश ने राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात पहली शताब्दी ईस्वी में कुषाणों ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जो उत्तरी भारत से लेकर मध्य एशिया तक फैला। इस काल में भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंध सुदृढ़ हुए और विदेशी सांस्कृतिक तत्त्वों को आत्मसात् कर भारतीय संस्कृति और भी समृद्ध हुई। महायान बौद्ध धर्म, गंधार कला तथा बुद्ध प्रतिमा का विकास इसी युग की देन है। कुषाण वंश के प्रमुख शासकों में कनिष्क प्रथम और हुविष्क का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। हुविष्क ने न केवल अपने पूर्वजों के साम्राज्य को बनाए रखा बल्कि कला, धर्म और निर्माण कार्यों में भी योगदान दिया। उसके शासनकाल की जानकारी साहित्यिक तथा पुरातात्त्विक स्रोतों से मिलती है, जैसे कल्हण की राजतरंगिणी, अभिलेख एवं सिक्के। कुषाण वंश ने लगभग 150 वर्षों तक शासन कर भारतीय इतिहास में स्थायी प्रभाव छोड़ा।

KEYWORDS : कुषाण वंश, हुविष्क, कनिष्क, गंधार कला, महायान बौद्ध धर्म, मध्य एशिया, राजतरंगिणी, अभिलेख, सिक्के, भारतीय संस्कृति।

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