This page was exported from International Journal of Information Movement [ http://www.ijim.in ]
Export date: Wed Oct 21 7:17:19 2020 / +0000 GMT

Paper 9-भूमंडलीकरण के परिप्रेक्ष्य में हिंदी साहित्य


PAPER ID:IJIM/V.2(IX)/48-50/9


AUTHOR: डॉ.जिनो पी.वरुगीस


TITLE : भूमंडलीकरण के परिप्रेक्ष्य में हिंदी साहित्य




भूमिका: इक्कीसवीं सदी में समय ,समाज, संस्कृति ,देश और भाषा में परिवर्तन आ रहा है I परन्तु इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है I परिवर्तन युग की मांग है I इस परिवर्तन का अन्य एक नाम है ‘ भूमंडलीकरण ' अर्थात ग्लोबलाइजेशन ( Globalization ) I आज यह शब्द अपेक्षाकृत नया और काफी प्रचलन में आया शब्द है I इसे हिंदी के साथ जोड़कर अक्सर सुना जाता है I हिंदी भाषा और साहित्य पर इसका प्रभाव गहरा है I भूमंडलीकरण हिंदी साहित्य जगत को रूपायित किया है I इस सन्दर्भ में ग्लोबल होती हिंदी साहित्य पर चर्चा अनिवार्य है I




मूल शब्द :भूमंडलीकरण ,हिंदी साहित्य



Click here to download fulltext

Click here to download certificate
Post date: 2018-01-29 03:47:28
Post date GMT: 2018-01-29 03:47:28
Post modified date: 2018-03-30 05:09:15
Post modified date GMT: 2018-03-30 05:09:15
Powered by [ Universal Post Manager ] plugin. HTML saving format developed by gVectors Team www.gVectors.com